रास्ते वो कैसे थे जिनपर हम खड़े थे,
वो नाचीज भी न जाने कैसी जिद पर अड़े थे,
हमने लाख मुड़ना चाहा पर उन्होंने मुड़ने न दिया,
आँख जब हमने खोली चलने के लिए तो वो कहीं ओर हम कहीं ओर पड़े थे ।
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Tearinked ©️
written by prince sisodia
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